“स्वामी जी के अनमोल सत्य वचन” बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के ऐसे प्रेरणादायक वचनों का संकलन है, जिन्हें उनके साथ रहने वाले श्रद्धालुओं ने समय-समय पर लिखकर सुरक्षित रखा। पुस्तक में दिए गए प्रत्येक वचन के साथ संबंधित तारीख भी दी गई है। इन वचनों में जीवन, गुरु-भक्ति, साधना, सदाचार और मानव जीवन के लिए उपयोगी अनेक संदेश मिलते हैं।
स्वामी जी के अनमोल सत्य वचन
पुस्तक: स्वामी जी के अनमोल सत्य वचन
प्रकाशक: अन्तर-ध्वनि संस्थान, मथुरा


14 मार्च 1995 से 20 मार्च 1995 तक
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज का वचन:
बिना मतलब तुम घर से बाहर मत निकलो और दूसरी बात यह है कि किसी के साथ वाद-विवाद में मत पड़ो।
अगला वचन:
हिन्दू मुसलमान छोट बड़े सब एक दूसरे का साथ दो और प्यार मुहब्बत से रहो आगे समय बहुत ही खराब आ रहा है।
अगला वचन:
तुम इस बार मेहनत कर दो फिर आगे तो ताज है। दूबले के सिर पर सेहरा तो एक ही बार रखा जाता है।
अगला वचन:
जो दूसरों की निन्दा और आलोचना करते रहते हैं वे भजन नहीं कर सकते। महात्माओं ने कहा है निन्दा करने से पाप कर्म चढ़ते हैं, जिसकी निन्दा की जाती है वो हल्का हो जाता है। निन्दक अपने लिए नरक का दरवाजा खोल देता है।
अगला वचन:
सत्संगी जब अपने अंतर में तारा मण्डल, सूर्य चाँद और दैविक मण्डलों में देवी देवताओं को देखता है, उनसे बातें करता है तो इन सब बातों को किसी से कहना नहीं चाहिए। उसे केवल गुरु को ही बताना चाहिए। गुरु का यही आदेश है।
14 नवम्बर 1995 से 20 नवम्बर 1995 तक
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज का वचन:
फकीर ही खुदा की जाति की तस्वीर है। वे खुदा से मिले हुए होते हैं। उनकी दया मेहर हो जाय तो एक क्षण में कुछ का कुछ हो सकता है।
अगला वचन:
जो शक्तियां ऊपर के मण्डलों से इस पृथ्वी पर आई हैं वो अब मैदान में उतरने वाली हैं। उनका काम होगा अधर्मियों का विनाश करना और धर्म की स्थापना करना।
7 मार्च 2000 से 13 मार्च 2000 तक
इसके नीचे अगला वचन शुरू हो रहा है:
जब मैंने पहले ‘जयगुरुदेव’ का नाम उच्चारण किया तो लोग…